अराबा उड़ौ (कल्याणपुर बालोतरा)के युवाओं ने अपने गाँव के वन्यजीवों के लिए तासलीकार खेली बनवाई है।बहुत ही नेक ओर बेहतरीन काम युवा साथियों द्वारा अपने गाँव के हिरणों मोरो ओर अन्य वन्यजीवों के हितार्थ।हमारे द्वारा बनाया गया ये खेली का तरीका पूरे राजस्थान में युवाओं द्वारा अपनाया जा रहा हैं।पिछले साल भी युवाओं ने तीस से अधिक गाँवों में खेलिया बनाई थी ओर इस वर्ष भी ये सिलसिला जारी है।बाड़मेर के कई पर्यावरण पर्यावरण प्रेमी युवा भी ऐसी खैलियो का निर्माण करवा रहे है।अराबा उडौ गांव आज भी नशामुक्त गांव है ओर साफ सफाई ऐसी की कहीं आपको पॉलीथिन का एक टुकड़ा नजर नही आयेगा।गांव के चारों ओर चार ओरण ओर छोटे छोटे तालाब हैं जो बहुत ही व्यवस्थित है।ओर यहां वन्यजीवों के लिए चुगा पानी की व्यवस्था गांव मिलकर करते है।पुराना ऐतिहासिक कुआँ भी है।ओरण में जाल ओर केर के पेड़ों का घना जंगल है जो गाँव का पर्यावरण स्वच्छ रखने के साथ साथ वन्यजीवों के आश्रय स्थल भी है।किसी तरह के स्थानीय पेड़ों को काटा नहीं जाता है।ये आंजणा(पटेल) ओर राजपूत समाज का बाहुल्य गांव हैं।ओर गांव के चारो ओर हिरण बहुतायत में घूमते नजर आते है आज भी।अक्सर हर गांव के बाहर प्लास्टिक के ढेर दिखाई देते हैं लेकिन यहां आकर ये भ्रम टूट जाता है।स्वच्छ भारत अभियान का बेहतरीन उदाहरण है ये गांव।बेहद सुंदर गांव है ओर गाँव का फला(एंट्री गेट)देखकर ही पता लग जाता है कि कितने शिक्षित ओर सभ्य लोग गाँव में रहते हैं।मैंने कई बार पर्यावरण हितों को लेकर सोशल मिडिया पर कई गाँवों के बारे में खरी खरी लिखी हैं चाहे कई गाँवों के ओरणो से केर कटाने के बारे में हो या तालाबों को खराब करने के बारे में।अंजाम जो हो पर युवाओं को ऐसे गाँवों से प्रेरणा लेनी चाहिये और अपने गाँव को स्वच्छ रखने के साथ गांव के वन्यजीवों का संरक्षण करना चाहिये।गाँव के सभी युवाओं को बहुत बहुत धन्यवाद जो इतना अच्छा काम कर रहे हैं।

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