राजस्थान में उगने वाला एक झाड़ीदार घाँस जिसे #खींप कहते है... इस समय इस पर फलियों की बहार हैं, इन फलियों को #खिंपोली कहते है...।।
खींप का वानस्पतिक नाम #Leptadenia_pyrotechnica हैं..।
खींप कोई सामान्य घाँस नही यह अनेक गुणों से भरी हैं,एक ओर जहां यह मिट्टी के कटाव को रोके रखती हैं वही इसकी जड़,तना, रस व फलियां इंसानों से सहित दुधारू पशुओं के अनेक रोगों को दूर करने वाली होती हैं...।
इसकी फली की शानदार सब्जी बनाई जाती हैं..इसके कांड/टहनी से घरों की बड़ी ही शानदार छप्पर बनाई जाती हैं..पशु के बाड़े के लिए इसकी झाड़ू भी बनाई जाती हैं, जिसे हम लोग #बागरा कहते है..।।
जंगल मे जब कांटा लग जाता हैं तो खींप को कूटकर उसका रस लगाने से पुराने से पुराना कांटा निकल आता हैं...।।
राजस्थान के #होशियारसिंह जी ने कम शब्दों में इसकी सुंदर व्याख्या एक कविता के रूप में की हैं..।।
पुराने वक्त में खेतों में
मिलता था पौधा खीप
पशु खाते, रस्सी बुनते
चेचक में लेते थे लीप,
खुरसने से मिलता था
पत्ते अल्प नजर आते
झाड़ी बनकर जंगल में
ये सरीसृप को लुभाते,
जंगल में गुब्बारा चाहे
खीप कपड़े पर मलते
पीछे से जब फूंक लगे
हवा में गुब्बारे निकलते,
पशु रोग जब हो जाते
काट पीट इसे चराते थे
कितने ही पशु रोगों को
इस पौधे से ही हटाते थे,
वन में मिट्टी कटाव को
खीप बखूबी से रोकते थे
अनोखा उपहार वनों का
रक्तस्राव को ये रोकते थे,
आंख का लोशन बनता
चेचक रोगों में मलते थे
गुर्दे के रोग,पत्थरी,खांसी
कितने रोग ही टलते थे,
पेट दर्द, गठिया, गर्भपात
बांझपन, यौन रोग हटाए
सिरदर्द, पशु पेट घटाए
सब्जी बनाकर इसे खाए,
दंत रोगों में खीप काम का
कंटेनर इसके ही बनते हैं
पशुचारे के काम में आता
घर, छप्पर इसके बनते हैं,
कितने खीप रोग दूर करे
कितने ही काम का होता
देसी दवाएं घर पर बनाते
कितने के घाव यह धोता
खींप से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करें


0 टिप्पणियाँ